• भारत का संविधान हमारी संस्कृति और विरासत का प्रतीक है: विजय गोयल
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1.भारत का संविधान हमारी संस्कृति और विरासत का प्रतीक है: विजय गोयल
2. भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है - गोयल
3. स्कूलों में नियमित तौर पर मॉक संसद के कार्यक्रम होने चाहिए - गोयल

नवंबर 26, 2021, नई दिल्ली पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने कहा है कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है. यह हमारी संस्कृति का परिचायक है. संविधान ने हमें मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं. हमें अपने महान संविधान की कद्र करते हुए, कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जो संविधान सम्मत ना हो.
श्री गोयल नवंबर 26, 2021 को संविधान दिवस के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति और  बिल्ड इंडिया ग्रुप द्वारा आयोजित “राष्ट्र निर्माण में मौलिक कर्तव्यों” का महत्व विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे I श्री गोयल ने कहा कि वर्ष 2015 में माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने संविधान दिवस मनाने की शुरुआत की थी I इसके पीछे उनका उद्देश्य लोगों को संविधान के प्रति जागरूक करना था I उन्होंने आह्वान किया कि स्कूलों में नियमित तौर पर मॉक संसद के कार्यक्रम होने चाहिए, ताकि भावी भारत के भविष्य हमारे विद्यार्थी संसदीय प्रक्रियाओं की बारीकी समझ सकें I
गोयल  ने कहा हमे अपने  संविधान और भी जानना चाहिए।  क्योकि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित सविधान हैं भारत के लोग संविधान के परम सरंक्षक है उनमे ही संप्रभुता निहित है और उन्ही  संविधान को अंगीकार किया गया।  
कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए बिल्ड इंडिया के श्री बिराजा महापात्रा ने कहा कि भारत का संविधान एक ऐसा दस्तावेज है, जो हमें इस देश में रहने का और यहाँ के संसाधनों के उपयोग करने का अधिकार देता है. यह एक ऐसा दस्तावेज है, जिसे सुप्रीम कोर्ट और देश के विभिन्न कोर्ट प्रतिदिन अपनी कसौटी पर कसता है.
हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष श्री लक्ष्मीदास ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसके निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। आज उन महान लोगों को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपनी तपस्या से इस महान दस्तावेज को हमारे सामने रखा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत का संविधान भी बदलते समय और परिस्थितियों के आधार पर संशोधन का अनूठा अवसर प्रदान करता है।
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक श्री दीपंकर श्रीज्ञान ने कहा कि हमारा संविधान मात्र एक  दस्तावेज नहीं है, अपितु यह एक पवित्र ग्रन्थ हैं, एक ऐसा ग्रन्थ जिसमें भारत का आत्मा बसती है.उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ संविधान में निहित हमारे कर्तव्यों को भी समझना होगा, तभी सच्चा राष्ट्र निर्माण हम कर पायेंगे.
इससे पूर्व गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के राजदीप पाठक और गुलशन गुप्ता ने संविधान की प्रस्तावना का क्रमश: अंग्रेजी और हिन्दी में वाचन किया. समिति के कार्यक्रम अधिकारी डॉ वेदाभ्यास कुंडू और दिल्ली विश्वविद्यालय की सुश्री ख़ुशी ने कार्यक्रम का संयुक्त रूप से संचालन किया.    
लगभग 14 राज्यों जैसे असम, बिहार, चंडीगढ़ दिल्ली, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, कोलकाता, हरियाणा, मेघालय और मणिपुर के बच्चों ने कार्यक्रम में ऑनलाइन भाग लिया और कार्यक्रम के विषय पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

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